CCE : Continuous & Comprehensiv Evaluaation
सतत एवं व्यापक मुल्यांकन के महत्वपूर्ण घटक है –
- सतत – मूल्यांकन में सतत का आशय लगातार एवं निरंतर चलने वाली प्रक्रिया से है तथा यह शिक्षण के दौरान सतत अवलोकन, कक्षा -कक्षीय शिक्षण,समीक्षा एवं नियोजन आदि से सीधी -सीधी जुडी हुई है-
- व्यापक – मूल्यांकन में व्यापक का आशय मूल्यांकन के क्षेत्रों एवं तरीकों की व्यापकता से है ,यह बालक को उपलब्ध करवाए जाने वाले अवसरों,तरीकों एवं अनुभवों में देखा जा सकता है –
CCE की पृष्ठभूमि –
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 ( RTE 2009 ) के अनुसार 0-14 वर्ष के बच्चों के सर्वागीण विकास हेतु गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था सरकार का दायित्व है जिसके तहत प्रारम्भिक शिक्षा के बच्चों के शैक्षिक उन्नयन के उद्देश्य से बाल्केंद्रित गतिविधि आधारित शिक्षण के साथ -साथ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन उपलब्ध करवाना अनिवार्य है
आकलन एवं मुल्यांकन :
- आकलन – आकलन छोटे-छोटे उदेश्यों के साथ किया जाता है ,आकलन से कार्य की क्रिया में निरंतर सुधार किया जाता है , आकलन में संभावना व्याप्त होती है,आकलन के चरणों को मिलाकर समग्र रूप से मूल्यांकन किया जाता है –
- मुल्यांकन – मुल्यांकन बड़े लक्ष्यों को इंगित करता है तथा निशिचता का बोध कराता है ,मुल्यांकन वः प्रक्रिया है जिससे यह पता लगाया जाता है कि बच्चों में अपेक्षित दक्षताएं किस स्तर तक विकसित हो पाई है
एक शैक्षिक सत्र के लिए योजना एवं आकलन की प्रक्रिया –
SIQE के तहत प्रत्येक कक्षा एवं विषय के लिए अधिगम उद्देश्यों को व्यवस्थित करते हुए शिक्षण सत्र को तीन टर्म में विभाजित कर आकलन एवं मुल्यांकन किया जाता है ,अत: सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) प्रक्रिया के मुख्य चरण निम्नलिखित है –
- आधाररेखा मुल्यांकन / पदस्थापन ( Baseline Assessment) – प्रत्येक सत्र के प्रारम्भ ( 01जुलाई से 15 जुलाई ) में कक्षा -कक्षीय प्रक्रिया के दौरान मौखिक,कार्यपत्रक एवं सह-शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का आकलन कर अपेक्षित प्रगति दर्ज करना ही आधाररेखा आकलन/मुल्यांकन है तथा प्रत्येक टर्म ( प्रथम टर्म ,द्वितीय टर्म,तृतीय टर्म ) के अंत में योगात्मक आकलन/मुल्यांकन (Summutive Assessment,SA-1,SA-2,SA-3) से प्राप्त अधिगम स्तरों की प्रगति को दर्ज कर बच्चों को आगामी टर्म के लिए पदस्थापन किया जाता है –
- सतत एवं व्यापक मुल्यांकन/आकलन योजना ( Continuous & Comprehensive Evaluation ) – आधाररेखा एवं पदस्थापन आकलन/मूल्यांकन से प्राप्त कक्षा स्तर को शिक्षक द्वारा अध्यापक पाक्षिक योजना डायरी में संधारित किया जाता है और इसके आधार पर प्रत्येक कक्षा (1-8) एवं विषयवार पाक्षिक शिक्षण योजना का निर्माण कर शिक्षक कक्षा-कक्षीय शिक्षण प्रक्रिया करवाते हुए सतत एवं व्यापक मुल्यांकन किया जाता है
- रचनात्मक आकलन/मुल्यांकन( Formative Assessment ) – एक ऐसी मुल्यांकन प्रक्रिया जो सीखने की प्रक्रिया या कक्षा-कक्षीय प्रक्रिया के दौरान की जाती है ,इसका उद्देश्य बच्चों की वर्तमान समझ एम् प्रगति को जानना,निरंतर अवसर देकर अधिगम की कमियों को दूर करना है ,जो बच्चों की गहरी समझ विकसित करने में मदद करता है ,इसके लिए शिक्षक कक्षा-कक्षीय शिक्षण प्रक्रिया के दौरान प्रगति (ग्रेड a,b,c,) को रचनात्मक आकलन की चेकलिस्ट में संधारित कर आगामी योजना बनाता है
- योगात्मक आकलन /मूल्यांकन ( Summutive Assessment,SA-1,SA-2,SA-3) – प्रत्येक टर्म के अंत में योगात्मक आकलन/मूल्यांकन में ग्रेड दर्ज करने हेतु शिक्षक निम्न दस्तावेजों को आधार बनाया जाता है – (1) चेकलिस्ट (2) स्व-अनुभव /समीक्षा (3) कक्षा कार्य (4) गृहकार्य (5) पोर्टफोलियो (6) वर्कशीट /वर्कबुक (7) अभिभावक -संवाद (8) सह-शैक्षिक गतिविधि (9) पेपर-पेन्सिल टेस्ट आदि के साक्ष्यों को सम्मलित किया जाता है
- पोर्टफोलियो – SIQE के अंतर्गत CCE के लिए एक निशिचत अवधि में बच्चों की उत्तरोतर अधिगम उपलब्धि को संचयी साक्ष्य के रूप में एक पोर्टफोलियो संधारित किया जाता है ,जिसमें बच्चों की कक्षा-कक्षीय प्रक्रिया में रचनात्मक एवं योगात्मक आकलन के दौरान अकादमिक प्रगति के साक्ष्य यथा ( आधाररेखा आकलन,पदस्थापन,कार्यपत्रक,वर्कबुक,मौख़िक गतिविधि के आधार पत्र एवं योगात्मक आकलन पेपर -पेन्सिल टेस्ट ) आदि के दस्तावेज एक फाइल में संधारित करना पोर्टफोलियो है ,इसमें संकलित दस्तावेजों पर शिक्षक की गुणात्मक टिप्पणी दर्ज एवं प्रतिपुष्टि प्रदान की जाती है अत: पोर्टफोलियो बच्चे की प्रगति का आइना है ,जिसे समय-समय पर अभिभावकों के साथ साझा किया जाता है –
- CCE में ग्रेड दर्ज करने की प्रक्रिया – सतत एवं व्यापक मुल्यांकन/आकलन में बच्चों की शैक्षिक उपलब्धि को तीन ग्रेडस (a,b,c) के द्वारा वार्षिक अभिलेख पंजिका में दर्ज किया जाता है
- A – स्वतंत्र रूप से कार्य करने की स्थिति या अग्रिम स्तर की समझ
- B– शिक्षक की मदद /मार्गदर्शन में काम करने की स्थिति /मध्यम स्तर की समझ
- C– शिक्षक की विशेष मदद से काम करने की स्थिति /आरंभिक स्तर की समझ
उपसहांर –सीसीई ( Continuous & Comprehensive Evalution ) अर्थात सतत एवं व्यापक मुल्यांकन बच्चों के स्तरों एवं प्रगति को जानने हेतु समर्थन देना ,सीखने-सीखाने की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना,बच्चों के व्यक्तित्व के सभी पक्षों पर जोर एवं सीसीई सीखने के दौरान लगातार चलता रहता है-
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