राजस्थान में CCE ( सीसीई ) संचालन –> सतत एवं व्यापक मूल्यांकन
CCE की पृष्ठभूमि एवं अवधारणा
शिक्षा का अधिकार कानून अधिनियम ,2009 धारा 29 ( 2 ) के अनुसार 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों का अधिकार है ,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना I RTE ( Right to Education,2009) कानून के सेक्शन 29 में स्पष्ट उल्लेख है कि कक्षा एक से आठ तक की कक्षाओं का पाठ्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास लाने वाला हो Iबच्चों ने जो सीखा है उसका मुल्यांकन उनके पढने के दौरान सतत होता रहे एवं बच्चों को परीक्षा का भय न हो –
RTE,2009 के प्रावधान है कि-
- हमें अपनी कक्षोंओं में शिक्षण कराने के तरीकों को बाल केन्द्रित हो I
- बच्चों की मूल्यांकन प्रक्रिया सतत एवं व्यापक हो ताकि बच्चों को परीक्षा का भय न हो I
- शिक्षक बच्चों के लगातार मुल्यांकन के आधार पर अपनी शिक्षण योजना का निर्माण करे और उसी के अनुसार बच्चों के साथ शिक्ष्ण कार्य करें तथा शिक्षक को अपनी योजना की समीक्षा कर बदलाव करने का अवसर मिल सके I
- शिक्षक दिए गये पाठ्यक्रम के अनुसार बच्चों का शैक्षिक स्तर देखें एवं सर्वागींण विकास के पहलुओं यथा कला,संगीत,व्यक्तित्व विकास,खेल एवं स्वास्थ्य में भी प्रगति दर्ज करें I
इसी आधार पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की प्रक्रिया वास्तव में व्यापक गुणवत्ता सुधार की प्रक्रिया ही है I सतत एवं व्यापक मुल्यांकन (CCE) का अर्थ विद्यार्थी के स्कूल -आधारित मूल्यांकन व्यवस्था से है,जो विद्यार्थी के सतत सीखने के सभी पक्षों पर ध्यान देती है I
अत: RTE 2009 के अनुमत सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में सततता जहाँ एक और कक्षा-कक्षीय प्रक्रिया के रूप में होगी वहीं सावधिक मूल्यांकन के रूप में भी होगी I व्यापकता बच्चों के विभिन्न कौशलों ,भावनात्मक और क्रियात्मक पक्ष को उजागर करता है I
राजस्थान में CCE लागु करने के चरण –
- प्रथम चरण ( 2010-11) –> राजस्थान में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन ( CCE) हेतु सत्र 2010-11 से अलवर एवं जयपुर जिलों के क्रमश: 40 एवं 20 विद्यालयों में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत की गई I प्रारम्भ में कक्षा 1-5 एनसीईआरटी



